कभी-कभी पहाड़ों में हिमस्खमलन सिर्फ एक ज़ोरदार आवाज़ से ही शुरू हो जाता है
Tuesday, November 13, 2012
भगत सिंह की जेल नोटबुक से
हो सकता है मेरी जिन्दगी दो चार दिन की ही हो
,
लेकिन मेरे हौंसले
आखिरी साँस तक मेरा साथ नही छोड़गें इसका मुझे विश्वास है।
भगत सिंह
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Most Popular
No comments:
Post a Comment